वो लड़का
वो बैठा था गुमसुम
ना करता था शोर ।
सोचता रहता था
ज़िन्दगी ने भी ले लिया ये कैसा मोड़।।
खामोश थे सारे ज़ज्बात
वीराना था ये आशिया ।
सुनसान थी राहें
खो गया था सारा ज़हा ।।
यादें परेशान करती थी
नए नए सवाल करती थी ।
आँखें भी कहाँ साथ देती थी
खुली पलकों में रातें बीत जाया करती थीं ।।
सुबह का सूरज नयी आशाएं लेकर आता था
बंद आँखों वाले ख्वाब खुली आँखों को दिखाता था ।
दिल के किसी कोने से आवाज़ आती
जब नहीं रहा दीया तो क्यों जले बाती ।।
लोगो के बीच रहना वो सीख रहा था
मर कर जीना वो सीख रहा था ।
यूँ तो तरीके बहुत थे रोने के
मायूसी में हँसना वो सीख रहा था ।।
आंसू ना बहाना ना फ़रियाद करना
अपने दिलों में बस उसे याद रखना ।।।
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